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Tag: Bundelkhand

2010.09.07 09:44:04
rawat167

सरकार का आपदा प्रवन्धन विभाग अपने पहले चरण पूर्वानुमान में ही फेल हो जाता है

http://lh5.ggpht.com/_XpcuWNz7k5Y/S-6a36PvsSI/AAAAAAAABQ0/I3_m79kQKt0/bundelkhand_100.jpgभारत सरकार ने देश को दैवीय आपदाओं के प्रभव से बचाने अथवा उनके प्रभाव को कम करने के उद्देश्य से डिजास्टर मैनेज मेन्ट डिपार्टमेन्ट की स्थापना की है जो देश के किसी भी भाग में बाढ, सूखा, भूस्खलन या भूकम्प से बचाने या उसके प्रभाव को कम करने की जिम्मेदारी सम्भालता है। किसी भी आपदा के प्रवन्धन का पहला चरण है उस आपदा की पूर्व जानकारी और इसके लिए भरत सरकार नें अर्लीवार्निं सिस्टम की स्थापना कर रखी है। इसमें कोई सन्देह नहीं कि हमारा जैसा अर्लीवार्निन सिस्टम दुनियां में और कहीं नहीं है।

लेकिन सूखे के सन्दर्भों में तो सरकारी अर्लीवार्निंग सिस्टम यानी हमारा मौसम विभाग हमेशा ही औंधे मुंह ही गिरता है। मौसम विभाग द्वारा पिछले एक महीने में की गयी दो अलग अलग घोषणाओं पर ही नजर डालें तो उसकी कलई खुल जाती है। माह मई के अन्तिम सप्ताह में उसने घोशित किया कि इस वर्ष औसत से अधिक और समय से एक सप्ताह पूर्व ही वर्षा होगी, लेकिन जब समय पर भी वर्षा नहीं हुई तो गलती के कारणों को बिना बताए ही दुबारा घोषणा जून के अरन्तम सप्ताह में कर दी कि अब सूखा पडने की पूरी सम्भावना है तथा मानसून 15 दिन विलम्ब से चल रहा है।

लेकिन जिन पर सूखे का असर कहर बन कर टूटता है वह तो अपनी फसल की कटाई करते करते ही जान गए थे कि इस साल भी इन्द्र देव का मिजाज गरम ही रहेगा, और इसके लिए जितना उनके बस में है उतनी तैयारी भी करली थी। लेकिन दसाब्दियों से सूखे की मार झेल रहे किसान के पास अब बचा ही क्या है जिससे वह अब बचाव कर सकेगा। उसके पास नतो कम पानी में पैदा होने वाले बीज बचे हैं और नाही खेत में पानी संचित कर लेने वाली बन्धियां। उसके पास नतो मिश्रत फसलचक्र बचा है नाही उसके साथी पशु और उनकी खाद, पास बचा है तो बस पुरखों द्वारा दिया गया ज्ञान वह भी केवल इस लिए बच गया चूकिं कम पढा लिखा होने के कारण वैज्ञानिकों के ज्ञान तक पहुंच नहीं पाया।

अपने इस पारम्परिक ज्ञान के बल बूते किसान सूखे जैसी आपदा के साथ संघर्श ही नहीं कर रहे बल्कि उसमें विजय हासिल करते भी नजर आ रहे हैं। ऐसा भी नहीं कि यह पारम्परिक ज्ञान कुछ गांवों के कुछ लोगों के ही पास सीमित हो, बल्कि यह ज्ञान तो हर गांव के दस पचीस लोगों के पास है जो उन्हे उनके पूर्वजों के द्वारा किम्बदन्तियों कहावतों के रुप में प्राप्त हुआ है। चूंकि यह ज्ञान उनके खानदान को अलग से सामाजिक पहचान देता था अतः वह दसे सम्भाल कर रखते थे और समय समय पर दसका परिमार्जन भी करते थे।

लेकिन रीति-रिवाज, परम्पराओं-प्रथाओं, सभ्यता-संस्कृति तथा रुढियों और कुरीतियों में विभेद की समझ बनाए बिना ही तथा कथित वैज्ञानिक मानसिकता ने हमारे सदियों से परिक्षित इस ज्ञान का उपहास उडाया, सीधे और सरीफ किसान इन तथा कथित वैज्ञानिकों को भी सन्यासी समझने की भूल कर बैठे उन्हें क्या पता कि वैज्ञानिकों के वेश वह किसी कम्पनी के सेल्समैन हैं। फिर क्या था किसानों ने इन सेल्स मैनों के इसारे पर अपने उस ज्ञान को विस्म्रित कर दिया, और इसी के साथ ही सूखे की विभीशिका का असर भी अधिक दिखने लगा। इस लिए कि सेल्स मैनों की यह प्रडाली खर्चीली ही नहीं धोखेबाज भी है।

डिजास्टर मैनेजमेन्ट केलिए, लागों द्वारा, लोगों केलिए बिना खर्चे के अर्लीवानिंग सिस्टम के ऊपर सेल्समैनों द्वारा, कम्पनियों केलिए करोडों रुपए लाभ का यह अर्लीवार्निं सिस्टम लाद दिया गया। कोशिशें तो बहुतेरी की गयी लेकिन लोगों के अर्लीवार्निं सिस्टम को आज भी पूरी तरह से खतम नहीं किया जा सका। इसके अवशेष तो हर गांव में मिल जायगें लेकिन हमीरपुर जिले की तहसील मौदहा के एक गांव अकबई में डिजास्टर मैनेजमेंन्ट केलिए केवल अर्लीवार्निंग सिस्टम ही नहीं बल्कि पारम्परिक ज्ञान पर आधारित उसके सभी चरण प्रत्यक्ष रुप में विद्यमान हैं।

अकबई के लोग रवी फसल की कटाई शुरु करते अगले साल के मौसम का अनुमान लगाना शुरु कर देते हैं। फसल की कटाई पूरी करते करते लोग मय कर लेते हैं कि अगला मौसम कैसा होगा, अतिवृष्टि, अनावृष्टि, ओला, पाला या फिर इस वर्ष किस प्रकार के कीट पतिंगों का प्रकोप होने वाला है। बस फिर क्या है अगर किसान को इतना पता चलजाय। इसके बाद किसान मिजुलकर तय करते हैं कि किस तरह के बीजों का बोना उपयुक्त होगा, मिश्रित फसलों में कौन कौन सी फसलें शामिल की जानी चाहिए। फसल अगैती बोई जाय या पिछैती। इस प्रकार किसान किसी भी आपदा के समय भी किसान अपने खनें खर्वे केलिए अनाज पैदा हीकर लेता है।


  Bundelkhand
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2010.09.03 06:42:37
rawat167

बुदेलखंड पर योजना आयोग की आठ को अहम बैठक

नयी दिल्ली। राजनैतिक दृष्टि से संवेदनशील तथा सूखे की मार झेल रहे बुदेलखंड क्षेत्र में सूखे से निबटने की नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिये योजना आयोग द्वारा नवगठित सलाहकार समिति की पहली महत्वपूर्ण बैठक आठ सितंबर को राजधानी में होगी। 

गठन के साथ ही राजनैतिक विवाद में घिर गई समिति की पहली बैठक में चर्चित बुदेलखंड पैकेज के मद्देनजर इन योजनाओं की प्रगति का जायजा लेने क्षेत्र के विकास के लिये बहुआयामी नीतियां बनाने तथा क्षेत्र से सम्बद्ध राज्य सरकारों.मध्य प्रदेश एवं उत्तर प्रदेश की भागीदारी . नयी नीतियां बनाये जाने सहित तमाम मुद्दों पर व्यापक चर्चा की जायेगी। योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया समिति के अध्यक्ष हैं। बुदेलखंड क्षेत्र से सांसद तथा इस समिति के सदस्य केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्यमंत्री प्रदीप जैन आदित्य ने कहा कि अत्यंत पिछडा बुंदेलखंड क्षेत्र वर्षों से उपेक्षित रहा है। इस समिति का गठन क्षेत्र को सूखे से उबारकर इसके त्वरित सर्वांगीण विकास की मंशा से किया गया है। इसमें किसी प्रकार की राजनीति ढुंढना कतई अनुचित है और वैसे भी विकास के नाम पर राजनीति करना कभी भी कांग्रेस का एजेंडा नहीं रहा। उन्होंने कहा कि उपेक्षित बुंदेलखंड में आम आदमी और किसान की दुर्दशा को देख राहुल गांधी ने वहां के विकास का.विजन. देखा और केंद्र ने भी क्षेत्र के विकास के लिये 7266 करोड रूपये का बुंदेलखंड पैकेज दिया। ऐसे में अगर योजना आयोग क्षेत्र के सभी दलों के सांसदों को साथ लेकर वहां की विकास योजनाओं के प्रभावी तथा पारदर्शी क्रियान्वयन के लिये कोई समिति बनाता है तो इससे किसी को भी ऐतराज आखिर कैसे हो सकता है।

गौरतलब है कि गत 30 अगस्त को एक सरकारी आदेश के तहत गठित इस पंद्रह सदस्यीय समिति में कांग्रेस सहित क्षेत्र के सभी दलों के सांसद भी शामिल हैं।  श्री जैन ने कहा कि समिति के जरिए क्षेत्र के विकास में सभी दलों के सांसदों की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। लेकिन विपक्ष का आरोप है कि कांग्रेस ने मध्यप्रदेश तथा उत्तर प्रदेश सरकारों को पैकेज के लाभ का सेहरा नहीं लेने देने की मंशा से यह चतुराई भरा कदम उठाया है। कांग्रेस सूत्रों के अनुसार दरअसल दोनों राज्य सरकारें पैकेज के फंड का सही इस्तेमाल नहीं कर रही थीं और इसके बारे में काफी शिकायतें भी आ रही थीं। ऐसे में अगर इन्हीं राज्य सरकारों के दलों के सांसदों को समिति में शामिल करके कार्यक्रमों के क्रियान्वयन को पारदर्शी बनाने की कोशिश की गई है तो आपत्ति क्यों है। 

समिति में श्री जैन के अलावा केन्द्रीय योजना मंत्री वी नारायण सामी, बहुजन समाजपार्टी के आर.के. सिंह पटेल एवं विजय बहादुर, समाजवादी पार्टी के घनश्याम अनुरागी तथा भारतीय जनता पार्टी के अशोक अर्गल तथा जितेन्द्र सिंह बुंदेला भी शामिल है। श्री जैन ने कहा कि दरअसल विकास केन्द्र के साथ साथ राज्यों की सहभागिता से ही संभव है लेकिन दुख की बात है कि बुंदेलखंड वर्षो से सूखे की मार झेल रहा है। विकास यहां अछूता ही रह गया है। क्षेत्र में पर्यटन की आपार संभावनाएं है जिससे काफी लोगों को रोजगार मिल सकता है। लेकिन दोनों राज्य सरकारों ने क्षेत्र की उपेक्षा की जिससे क्षेत्र की स्थिति बद से बदतर होती गई। राज्य सरकारों ने जो योजनाएं बनायी थी उनके क्रियान्वयन से कहीं ज्यादा उनका ध्यान राजनीतिक फायदा लेने का रहा। ऐसे में अब अगर क्षेत्र में स्थिति सुधारने के लिए सरकार बुंदेलखंड पैकेज के बाद और प्रभावी कदम उठा रही है तो उनका सभी को स्वागत करना चाहिए। 


  Bundelkhand | Panel on Bundelkand to meet soon | Planning Commission on bundelkhand
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2010.08.20 13:04:09
kpt

We want solved water problem in bundelkhand and its solution.

बुंदेलखंड में टीकमगढ़ और छतरपुर जिले को यदि सरकार रोटी पानी देना चाहती है,यहाँ के लोगों का विकास करना चाहती है और आगे के नौजवान बच्चों,आने वाली पीढ़ियों को आत्मनिर्भय बनाना चाहती है तो पंजीरी खिलाने और रहत कार्यों की भूरसी बाँटने से उत्तम रहेगा और लोगों को सदैव के लिए पानी रोटी के अभाव से मुक्ति दिलाने के लिए विकास के नाम पर केवल एक ही योजना की जरूरत है कि बुंदेलखंड में टीकमगढ़ छतरपुर आदि कि छोटी बड़ी नदियों के बांध बना दिए जाएँ चाहे वो विशाल झीलों के रूप में ही क्यों न बने हों और उनसे दोनों जिलों में मुख्या नाहर निकल कर उनसे छोटी शाखा नहरें बनाकर क्षेत्र के तालाबों से जोड़ दिया जाये ताकि जब बांधों वाली नदियों में बाढ़ ए तो वह बाद का पानी आगे न जाकर नहरों से बिभाजित होकर क्षेत्र के सरे तालाबों को भर देगा ! जब पानी होगा तो कृषि विकसित होगी लोगों का रोटी और रोजगार के लिए क्षेत्र से जाना बंद हो जायेगा क्योंकि रोटी खेत से पैदा होती है न कि कारखाने और अन्य स्थान से नहीं !

रोटी को पैदा करने कि लिए सिचाई के जल कि आवश्यकता है जिसके लिए सदियों से बुंदेलखंड का किशन परेसान है ! यदि पानी का भरपूर प्रबंध कर दिया जाता है तो सारी समस्याओं का समाधान स्वमेब हो जायेगा!

अनेक क्षेत्रों में थोडा थोडा से विकास सरकारी खजाने की बर्बादी के सिवा कुछ नहीं है क्योंकि उससे न तो विकास दीखता है और न ही रोटी होती है और न रोजगार !
उपाय :

पानी के प्रबंध के लिए धसान नदी पर वरापटा पर बांध बनाना उपयुक्त रहेगा क्योंकि केवल २०० मी. बांध बनना है और दोनों तरफ ऊँचे ऊँचे पहाड़ है केवल नदी पर ही पक्का बांध बनना है इस पर चाहे कितना भी पैसा लगे २०० मी.पक्का ऊँचा बांध बन जाने से छतरपुर और टीकमगढ़ के सभी लोगों की सभी समस्याओं का समाधान हो जायेगा ! क्योंकि पानी का प्रबंध मुख्या है वही जीवन है !

डॉ.काशीप्रसाद त्रिपाठी
टीकमगढ़
  bundelkhand water problem | Bundelkhand
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2010.08.19 08:28:06
sanjaypanday

विदर्भ नहीं , बुंदेलखंड के किसानों पर बनी है आमिर की “पीपली लाइव” : संजय पाण्डेय

नई दिल्ली । बुंदेलखंड एकीकृत पार्टी के संयोजक संजय पाण्डेय के अनुसार आमिर खान की हाल ही में रिलीज हुई फिल्म “पीपली लाइव” विदर्भ नहीं बल्कि बुन्देलखंड के किसानो को लेकर बनी है। बुंदेलखंड के रायसेन जिले के बडवाई गाँव में फिल्माई गई इस फिल्म में बुन्देली संस्कृति तथा रहन सहन के साथ साथ पूरी तरह बुन्देली बोली ही प्रयुक्त की गयी है । उदाहारण के लिए नत्था की पत्नी धनिया अपने जेठ बुधिया से पूछती है ” काये कछू भओ का आज ?” तो उत्तर में बुधिया कहता है कि ” पईसा तौ मिले नैयाँ ” । कहने का तात्पर्य पात्रों के बीच बातचीत में ठेठ बुन्देली ही प्रयुक्त की गयी है। इतना ही नहीं बुंदेलखंड को लेकर केंद्र तथा राज्य सरकारों के बीच जो वाकयुद्ध पिछले कुछ वर्षों से चल रहा है उसको भी इस फिल्म में भी पूरी तरह समाहित किया गया है । “महगाई मारें जात है ” नामक चर्चित गाना बुन्देली साज-बाज के साथ गाया गया एक बुन्देली लोक गीत है । उल्लेखनीय है कि पिछले पॉँच वर्षों के दौरान बुन्देलखण्ड में लाखों किसान सूखे से प्रभावित हुए थे। इसके चलते यहाँ से भारी पलायन तथा भुखमरी के साथ साथ किसानों द्वारा आत्म हत्याओं की ख़बरें देश दुनिया तक पहुंची थी । इसी विषय को लेकर आमिर खान ने “पीपली लाइव” फिल्म बना डाली। किन्तु फिल्म में बुन्देलखंड के किसानों के हालातों का प्रस्तुतीकरण निंदनीय है।


  बुंदेलखंड | Bundelkhand | sanjay panday | peepli live 2010
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2010.07.27 07:37:45
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khajuraho ignored by the state goverment

कुंभकर्णी नींद में संस्कृति विभाग के अफसर, कैलेंडर से गायब खजुराहो महोत्सव, लोकरंग को भी भूले

खजुराहो मध्य प्रदेश की संस्कृति विभाग की वेबसाइट पर आज भी नहीं 

मध्यप्रदेश सरकार और महकमे के मंत्री भले ही राज्य की संस्कृति को विश्व मंच पर देखने की इच्छा रखते हों, लेकिन अधिकारी उनका सपना तोड़ने पर आमादा हैं. इसका ताजा प्रमाण है संस्कृति विभाग की वेबसाइट जो पिछले दो साल से अपडेट ही नहीं की गई है. लाखों रुपये की पगार पाने वाला महकमा अपने फर्ज़ को लेकर कितना गंभीर है, इसकी बानगी देखनी हो तो ज़रा www.mpculture.in पर क्लिक करके देखिये... अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त खजुराहो महोत्सव आपको ढूँढे नहीं मिलेगा. इससे पहले अपनी स्थापना के पच्चीस साल पूरे करने वाला लोकरंग महोत्सव भी अफसरों की नींद नहीं खोल पाया था और विभाग की वेबसाइट पर देश-दुनिया के कलाप्रेमी इस बड़े आयोजन से रूबरु नहीं हो सके. मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति विभाग की आधिकारिक वेबसाइट www.mpculture.in पर सांस्कृतिक आयोजनों को दर्शाने वाला कला पंचांग तो मौजूद है, लेकिन दरअसल विभाग के अफसरों ने साल 2008 में हुए अंतर्राष्ट्रीय रामलीला महोत्सव के बाद के किसी आयोजन की सुध लेना ज़रूरी नहीं समझा और इसके बाद के तमाम आयोजनों के बारे में इस वेबसाइट पर कोई जानकारी मौजूद नहीं है. सांस्कृतिक आयोजनों पर करोड़ों रुपये खर्च करने के बावज़ूद विभाग की वेबसाइट पर ही उनका प्रचार-प्रसार नहीं किया जाना ये साबित करता है कि अफसर अपने कर्तव्य के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति ही कर रहे हैं. ऐसे में एक सवाल विभाग के मुखिया के सामने भी है कि क्या ऐसे गैर ज़िम्मेदार अमले के बूते ही प्रदेश की संस्कृति विश्व पटल तक पहुँच पायेगी…?

http://www.mpculture.in/html/khajuraho.asp

 


  khajuraho | Bundelkhand | chhatarpur
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2010.07.14 05:38:36
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बुंदेलखंड में सोने के भंडार का पता चला

नई दिल्ली | वर्षो से सूखे की मार झेलता रहा बुंदेलखंड सोना भी उगल सकता है। इस सूखी मिट्टी के शुरुआती लक्षण और परीक्षण पूरी तरह ठीक निकले तो यह क्षेत्र कीमती धातु सोने के लिए भी जाना जाएगा। बुंदेलखंड के ललितपुर जिले में सोने के भंडार का पता चला है। सब कुछ ठीक रहा तो आने वाले दो-तीन वर्षो में बुंदेलखंड का यह इलाका उत्तर प्रदेश में सोने के सबसे बड़े भंडार के लिए मशहूर होगा। उत्तर प्रदेश खनन विभाग को ललितपुर से 90 किलोमीटर दूर गिरार गांव में जमीन से 290 मीटर नीचे सोने के भंडार का पता चला है। यहां से निकले सोने का विस्तृत ब्योरा जानने के लिए उत्तर प्रदेश खनन विभाग ने कनाडियाई कंपनी मैक्सटेक रिसोर्सेस लिमिटेड के साथ दो वर्षो के लिए एक सहमति पत्र (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं।

राज्य सरकार से मिले रिकानिसंस परमिट (आरपी) के तहत यह कंपनी सोने की गुणवत्ता और भंडार खोजने के लिए 67 करोड़ रुपये खर्च करेगी। इसी के तहत सोने के भंडार क्षेत्र की एरियल मैपिंग, सरफेस सैंपलिंग की जाएगी। खनन विभाग को सोनभद्र जिले में भी सोने के भंडार का पता चला है। शुरुआती जानकारियों के मुताबिक यहां सोने की मात्रा बुंदेलखंड क्षेत्र से कम होने के कयास लगाए जा रहे हैं। दैनिक जागरण से बातचीत में उत्तर प्रदेश के जियोलॉजी व माइनिंग विभाग में सलाहकार एसए ़फारुकी ने बताया कि गिरार गांव में सोने के भंडार का पता चला है। सोने की खोज 3.5 किलोमीटर लंबे व 300-400 मीटर चौड़े क्षेत्रफल में हुई है। यहां से 0.5 ग्राम प्रति टन से 13.5 ग्राम प्रति टन (एक टन मिट्टी से प्राप्त होने वाली सोने की मात्रा) की गुणवत्ता वाला सोना मिलने की संभावना है। फिलहाल, इससे ज्यादा कुछ कहना जल्दबाजी होगी। यूनाइटेड नेशन फे्रमवर्क क्लासीफिकेशन (यूएनएफसी) प्रणाली के तहत अप्रैल, 2005 तक भारत में 390.29 मिलियन टन सोने के अयस्क (स्वर्ण युक्त मिट्टी) का अनुमान लगाया गया है। इसमें 1.925 करोड़ टन को सुरक्षित श्रेणी में रखा गया। जबकि 37.104 करोड़ टन को बचे हुए संसाधनों को श्रेणी में रखा गया है। अयस्क के रूप में सोने का भंडार बिहार, कर्नाटक, राजस्थान पश्चिम बंगाल, आंध प्रदेश, केरल और मध्य प्रदेश में मिला है।

सबसे ज्यादा स्वर्ण घनत्व वाला अयस्क कर्नाटक, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, बिहार और आंध्र प्रदेश में मिला है। देश में सोने का भंडार पता लगाने के लिए भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) ने उत्तर प्रदेश, झारखंड, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, कर्नाटक, केरल में काम शुरू किया था। इस दौरान मिनिरल एक्स्प्लोरेशन कॉरपोरेशन लिमिटेड ने झारखंड, मध्य प्रदेश और राजस्थान में जबकि हुट्टी गोल्ड माइंस कंपनी ने कर्नाटक के रायचूर जिले में सोने का उत्खनन किया था। वैसे दुनिया में ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, चीन, पेरू, कनाडा और इंडोनेशिया में सोने के बेहतर भंडार मौजूद हैं। सोने का उपयोग आमतौर पर सोने का इस्तेमाल आभूषण बनाने में किया जाता है।

अब सोने ने इलेक्ट्रॉनिक्स में जगह बनानी शुरू कर दी है। इंडियन ब्यूरो ऑफ माइंस के मुताबिक सोने की 85 फीसदी खपत आभूषणों में होती है। जबकि इलेक्ट्रानिक्स में छह फीसदी और गिन्नियों में दो फीसदी खपत होती है। प्लैटिनम और पैलेडियम को सोने के विकल्प के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है। परंतु इनकी कीमत सोने से अधिक होने के कारण इनका इस्तेमाल कम ही है।


  Bundelkhand | gold in lalitpur | Bundelkhand mineral wealth | bundelkhand khanij sampada
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2010.07.07 12:00:23
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बुंदेलखंड में फिर से अकाल की संभावना :

बुंदेलखंड में पानी की समस्या हर साल बदती जा रही है परन्तु बुंदेलखंड के लोग आज भी राजनीति का मुंह देख रहे है की वो बुंदेलखंड के विकास करेंगे , नहीं !

बुंदेलखंड के लोगों से में प्रमोद रावत प्रार्थना करता हूँ की अपने पर्यावरण को बचाएं बुंदेलखंड का प्रत्येक व्यक्ति पेड़ पोधे लगाये जिससे बुंदेलखंड में पर्यावरण संतुलन बन जाये में राजनीतिक पार्टियों से यही अनुरोध है की बस बुंदेलखंड में कोई पेड़ पोधे लगाने की योजना बनाये जिससे लोग उनको लगायें और पेड़ पोधों को बचाने का प्रयास करें न की उनको  काटें जिस तरह का संरक्षण मध्यप्रदेश सरकार और उत्तरप्रदेश सरकार जंगली जानवरों को बचाने के लिए नए नए उपाय चलती है उसी तरह बुंदेलखंड में जंगलों को बचाना चाहिए !

जो तालाब  बुंदेलखंड में चंदेलकालीन है उनको फिर से नया रूप देना चाहिए और जो तालाब खत्म हो चुके हैं उनको फिर से बनाना चाहिए !

क्योंकि बुंदेलखंड में पानी की समस्या आज से नहीं वर्षों से चली आ रही है इसलिए बुंदेलखंड में पानी रोकने के लिए चंदेलकालीन राजाओं ने बहुत अच्छी प्रनाड़ी बना रखी थी जिसके तहत अगर किसी तालाब का पानी बाहर भी जाता है तो वो आगे जाकर किसी दूसरे तालाब को भर देता था लेकिन वो तालाब आज या तो खत्म हो गए हैं या उन पर लोगों द्वारा खेती की जा रही है !

राज्य और भारत सरकार को चाहिए की उन तालाबों की जानकारी ले कर उन तालाबों का पुनरोद्धार किया जाना चाहिए न की बलराम सागर और अन्य तरह के तालाब बनाने की योजना बनाना चाहिए !

क्योंकि इन योजनाओं का फायदा केवल गावं के सरपंचों और प्रधानो को मिल रहा है क्यों जिन लोगों के पास कुछ भी नहीं था आज वो लोग ४ पहिये वहां लेकर घूम रहे है और न तो किसी तलब का निर्माण होता है और न ही उसका फायदा गावों के लोगों को मिलता है !

अगर सरकार किसी तरह का १ अभियान चलाये और उसमे पता लगाये की किसी सरपंच या प्रधान पद पर आने से पहले उसके परिवार के पास कितनी संपत्ति थी  और ५ साल बाद उसके परिवार के पास कितनी संपत्ति है  तो सारी बात सामने आ जाएगी !

 


  Bundelkhand | बुंदेलखंड | water Problem in bundelkhand | bundelkhand me akal
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2010.07.07 10:44:09
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bundelkhand,politics on bundelkhand

बुंदेलखंड को लेकर उत्तर प्रदेश में फिर राजनीति गरमा गयी है. बुदेलखंड के लिए पैकेज देने के कांग्रेस के दांव के बाद दूसरे दल कांग्रेस को पटखनी देने की जुगत में हैं. कांग्रेस और सपा तो लगातार इसे सियासी पैकेज साबित करने में जुटी है, जबकि बुंदेलखंड मसले पर भाजपा किस करवट बैठेगी ये अभी साफ़ नहीं है....

ये कहने में कोई गुरेज़ नहीं है कि बुंदेलखंड पर दिल्ली की सरकार के पैकेज घोषित करने के बाद से उत्तर प्रदेश की राजनीति में भूचाल आ गया है. कांग्रेस ने बुंदेलखंड पर अपना दांव चल दिया है तो सपा-बसपा इस दांव को उलटा करने में जुट गयी है. कांग्रेस नेता इस पैकेज के बाद बुंदेलखंड में पार्टी को खड़ा करने के सपने सजोने लगे हैं. कांग्रेस नेताओं को लगता है कि बुंदेलखंड के बहाने उन्हें एक बड़ा हथियार मिल गया है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रमोद तिवारी का मानना है कि राहुल गांधी उस इलाके कि समस्याओं से खुद रूबरू हुए थे, जो दस सालों से उपेक्षित था, अब अगर बसपा को लग रहा है कि ये पैकेज कम है तो क्यों नहीं बसपा राज्य के बजट से उस कमी को पूरा करके बुंदेलखंड के लिए काम करती.

इसके पलटवार में बहुजन समाज पार्टी का कहना है कि आधी-अधूरी धनराशि का पैकेज घोषित कर इस इलाके की बदहाली के लिए कांग्रेस जिम्मेदारी से बच नहीं सकती। बसपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्या कहते हैं कि कांग्रेसी इसको लेकर राहुल गांधी के महिमामंडन में जुटे हैं, उन्हें बुंदेलखंड की समस्याओं से कुछ लेना-देना नहीं है. श्री मौर्या का कहना है कि बुन्देलखण्ड की जनता ने झांसी और ललितपुर के विधानसभा उपचुनाव में बसपा को जिता के बता दिया है कि वो किसके साथ है. इस हार के बाद ही कांग्रेस को पैकेज की याद आयी.
कुछ इसी तरह की बातें सपा भी कर रही है. सपा बुंदेलखंड पर कांग्रेस की राजनीति आलोचना कर रही है तो बसपा को भी आड़े हाथों ले रही है. सपा प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी का कहना है कि ये सब वोट बैंक के लिए हो रहा है न कि बुंदेलखंड की जनता के भले के लिए.
जबकि भारतीय जनता पार्टी इस मसले पर अपना रुख तय नहीं कर पायी है. वो इस पैकेज के बहाने केंद्र और राज्य दोनों पर निशाना साधना चाहती है. वरिष्ठ भाजपा नेता मुरली मनोहर जोशी का कहना है कि अगर वाकई ये जनता के भले के लिए है तो अच्छी बात है लेकिन अगर इसमें राजनीति की गंध आती हो तो ये ठीक नहीं है. क्योंकि बुंदेलखंड की समस्याओं पर गंभीरता से सोचने की जरूरत है. बहरहाल ये साफ़ नज़र आ रहा है कि सभी दल अपनी रणनीति २०१२ के विधानसभा चुनाव को लेकर बना रहे हैं. सबकी कोशिश है कि किसी तरह से बुंदेलखंड की जनता को खुश कर लिया जाए.


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  Bundelkhand | बुंदेलखंड
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2010.06.19 08:31:56
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पूर्वांचल, हरितप्रदेश, बुंदेलखंड, विदर्भ और तेलंगाना

आज मुझे तेलंगाना के साथियों ने दिल्ली में प्रदर्शन लिए याद किया. जंतर-मंतर पहुंचते ही मैने काले कोट वाले वकीलों के जखीरे को देखा. यह सभी विधिवेत्ता मुट्ठी बांधे अपने दांतों को भीचते हुए तेलंगाना की मांग का इजहार बड़े ही गुस्से से कर रहे थे. पिंजरे से आजाद पंछी की तरह समाजवादी निरंकुशता की कैद से आजाद मै भी वहाँ पहुंचा था. कलावती के विदर्भ के भी काफी लोग मिले जहाँ किसान आज भी आत्महत्या करते हुए असहज म्रत्यु का वरण कर रहे है. आज पूरे देश के संसदीय एवं विधानसभा क्षेत्रों की नई सीमारेखाओं का परिसीमन हो रहा है. घुट रही जन आकान्छाओं एवं क्षेत्रीय स्वाभिमान का मर्दन करते हुए तानाशाह राजनेता मात्र अपनी गद्दी के लिए चिंतित है. कुछ मायावती जी जैसे चालाक चालाक नेता है जो बिल्कुल सही प्रतीकात्मक राजनीति करते है. सुखदेव राजभर, स्वामी प्रसाद मौर्य, बाबू सिंह कुशवाहा और दारा सिंह चौहान को पद देदिया लेकिन इनके कहने से इनके समाज को और कहीं प्रतिनिधित्व मिलेगा, राम जाने? इसी तर्ज पर बहन जी उत्तर प्रदेश के बटवारे का बयान तो दे डाली लेकिन उनकी बहुसंख्यक सरकार विधानसभा से प्रस्ताव पारित कराने की प्रक्रिया से हिचकिचा रही है. प्रतीकात्मक राजनीति की बेताज महारानी चाहे कुछ करे या न करे लेकिन ढपोरशंख की भाँती वादा करने में बिल्कुल पीछे नहीं है

मेरी भूतपूर्व पार्टी के अभूतपूर्व नेता का तो जवाब नहीं. उनकी पूरी राजनीति विसंगतियों की है. उत्तराखंड को प्रथक करने का प्रस्ताव करके, विरोध कर डाला. आजतक उत्तराखंड में उनकी स्वीकार्यता न है और न होगी. यूपीए सरकार बचा कर कांग्रेस की इच्छा होने के बावजूद गठबंधन नहीं किया और कांग्रेस की राजनीति को पुनर्जीवन दे कर कर भी यथावत दुश्मन भी बने रहे. वामपंथियों के साथ जा कर नारायणन को कांग्रेस के समर्थन से राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित करके कलाम साहब के पक्ष में अटलजी को सुझाव दे डाले. सोमवार दिल्ली की प्रेसवार्ता में एस.पी. जैसवाल, जगदम्बिका पाल, जितिन प्रसाद की सीट छोडी और दूसरे ही दिन पलटवार करते हुए अपना उम्मीदवार दे डाला. लोकसभा चुनावों में कई उम्मीदवारों के टिकट एक ही दिन में दो-दो बार बदल डाले. हाल में ही मेरे मामले मेरी उलझनों को सुलझाते-सुलझाते एक ब एक मुझे ही मेरे अपमान की ज्वाला में अपने अनुज के प्रायोजित शब्दबाण से झुलसा गए. अब पूर्वांचल और उत्तरप्रदेश के बटवारे को रोकने की मुहीम चला रहे है. यहाँ आज़मगढ़ का यादव भी चींख-चींख कर कह रहा है “ए भाई कबले हमहने के ईहाँ इटावा राज करी, कल्बों हमहनों क आपन राज आई की ना”. इस जनवाणी की व्याख्या मुझसा तुच्छ प्राणी क्या करे. ईश्वर करे की मेरे भूतपूर्व दल के अभूतपूर्व नेता उत्तराखंड की भाँती पूर्वांचल, हरितप्रदेश और बुंदेलखंड की जनाभावनों के प्रतिकूल अपने राजनैतिक आचरण को सुधारें वरना उन्हें राजनीति के हाशिये पर जा कर अपने ही गृह जनपद इटावा के प्रसिद्द कवि श्री गोपालदास नीरज का यह गीत न गाना पड़े,

“कारवाँ गुजर गया और हम खड़े-खड़े गुबार देखते रहे.”


  बुंदेलखंड | Bundelkhand
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2010.05.19 07:28:36
rawat167

बांदा। प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह व कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी के बुंदेलखंड (bundelkhand) आगमन की सुगबुगाहट शुरू हो गई है। प्रदेश कांग्रेस के महासचिव तथा बांदा सदर के विधायक विवेक सिंह की देखरेख में स्थानीय जीआईसी मैदान में जनसभा की तैयारियां भी शुरू कर दी गई हैं। कांग्रेस खेमें से 15 मई के आसपास प्रधानमंत्री व राहुल गांधी के बांदा आगमन की जानकारी मिल रही है। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के गढ़ बुंदेलखंड (bundelkhand) में सेंधमारी की चल रही कांग्रेस की गतिविधियों में यह कार्यक्रम महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कांग्रेस के प्रदेश महासचिव और मीç़डया प्रभारी तथा बांदा सदर विधायक विवेक सिंह ने बताया, ""प्रधानमंत्री डा$ मनमोहन सिंह व कांग्रेस के महासचिव राहुल गांधी की संभावित जनसभा 15 मई के आसपास होगी। यहां के जीआईसी ग्राउंड में हम इसकी तैयार कर रहे हैं।"" बीते साल भी राहुल गांधी ने बुंदेलखंड (bundelkhand) के कई गांवों का गुपचुप दौरा किया था तथा इस दौरान दलितों के घरों में रूककर बसपा की नींद उ़डा दी दी थी। उल्लेखनीय है कि मायावती सरकार में बांदा के नसीमुद्दीन सिद्दीकी, बाबू सिंह कुशवाहा व दद्दू प्रसाद, अमरनाथ भास्कर व गंगा प्रसाद सहित दो दर्जन बसपाइयों को मंत्री पद के साथ-साथ विभिन्न आयोगों, निगमों में पदासीन कर लालबत्ती से नवाजा गया है। बसपा के जिला महासचिव लल्लू प्रसाद निषाद का कहना है, ""पीएम या राहुल के आने का कोई खास असर नहीं प़डता है। दलित समाज जागरूक हो गया है। अब नाटक-नौटंकी का जमाना नहीं रहा।
  Bundelkhand
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