छतरपुरछतरपुर बुंदेला राजपूत नेता छत्रसाल के नाम पर है, बुंदेलखंड आजादी के संस्थापक और उनके अज्ञात सैनिक की यादगार हैं ! छतरपुर क्षेत्र के कुछ स्थानमहाशिव :-यह स्थान सरसेद, छतरपुर में एक पहाड़ पर है। श्री शिवजी की पिंडी शनै:-शनै: बढ़ रही है और पहाड़ ऊंचा होता जा रहा हैं। तीस वर्ष पहले दर्शनार्थी मंदिर में घुसकर केवल सीधे बैठ सकते थे, पर अब झुक के खड़े हो जाते हैं। शिवलिंग पहले की अपेक्षा अधिक बड़ा और मोटा हो गया है। यहां वसंतपंचमी तथा शिवरात्रि को मेला सा लगा करता है। यह स्थान हरपालपुर स्टेशन से पश्र्चिम में २ मील दूर है। जटाशंकर :- जटाशंकर मंदिर अति प्राचीन है| यहाँ के स्वयंभू शिवलिंग का अनुमान लगाना अति कठिन है| इन जटाशंकर भगवन से अनेक सत्य प्रमाणिक घटनाएँ जुडी हुयी हैं | जिसमे प्रमुख घटना करीब २०० वर्ष पुरानी है| टीकमगड़ जिले खरगापुर तहसील का एक गांव है देवदा, जहाँ एक ब्राम्हण दंपत्ति निवास करते थे| उनके चार लड़के ओर एक लड़की थी| अत्यधिक सम्पन्नता के कारण ब्राम्हण दंपत्ति का जीवन सुखमय था| कुछ समय बाद ब्राम्हण का निधन हो गया ओर उस समय की परम्परा के अनुसार ब्राम्हणी ने सती होने का निश्चय कर लिया | बगराजन देवी :-महोबा-छतरपुर मार्ग पर गढ़ीमलहरा कस्बा से लगे जंगल में बुंदेलखंड की प्रसिद्ध देवी बगराजन का पवित्र दरबार सजा है। लोगों की आस्थाओं ओर विश्वास का तीर्थ माने जाने वाले इस मंदिर में हर साल नवरात्र के समय जहां नौ दिनों तक के लिए मेला सजता है, वहीं यहां आने वाले लोगों को संतान की प्राप्ति के लिए विशेष आशीर्वाद मिलता है। करीब 500 साल पुराने इस मंदिर में देवी माता की कोई प्रतिमा नहीं है, बल्कि उनका श्रृंगार और वस्त्र-आभूषण ही देवी रूप में पूजे जाते हैं। मंदिर के पुजारी भगवत दयाल वाजपेयी बताते हैं कि मंदिर में कई बार मूर्ति स्थापित करने का प्रयास किया गया, लेकिन वह सफल नहीं हुआ।
खजुराहो :-खजुराहो भारत के मध्य प्रदेश प्रान्त में स्थित एक प्रमुख शहर है जो अपने प्राचीन एवं मध्यकालीन मंदिरों के लिये विश्वविख्यात है। यह मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में स्थित है। खजुराहो को प्राचीन काल में खजूरपुरा और खजूर वाहिका के नाम से भी जाना जाता था। यहां बहुत बड़ी संख्या में प्राचीन हिन्दू और जैन मंदिर हैं। मंदिरों का शहर खजुराहो पूरे विश्व में मुड़े हुए पत्थरों से निर्मित मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है। भारत के अलावा दुनिया भर के आगन्तुक और पर्यटक प्रेम के इस अप्रतिम सौंदर्य के प्रतीक को देखने के लिए निरंतर आते रहते है। हिन्दू कला और संस्कृति को शिल्पियों ने इस शहर के पत्थरों पर मध्यकाल में उत्कीर्ण किया था। संभोग की विभिन्न कलाओं को इन मंदिरों में बेहद खूबसूरती के उभारा गया है। हजरत बाबा गुलाब शाह रहमत उल्लाह अलैह :- हजरत बाबा गुलाब शाह रहमत उल्लाह अलैह का संबंध हजरत बाबा ताजूउद्दीन ओलिया सरकार नागपुर से है, वे इनके गुरु थे। बाबा गुलाब शाह नौगांव निवासी थे। उनका जन्म लगभग 1858 में हुआ था। उनका परदा 1966 में हुआ। करीब 108 वर्ष पूर्व मजार में भगवान कृष्ण की मूर्ति बाबा ने अपने सामने बनवाई। बाबा गुलाब शाह कृष्ण उपासक थे लेकिन वे सभी धर्मों को मानने वाले थे। आज भी इनकी दरगाह में सभी धर्मों के लोगों का आना होता है और सरीफ सभी लोगों की मनोकामनाएं पूर्ण होती है। छतरपुर का वर्गीकरण इस प्रकार है
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