कालिंजर किला :–बुंदेलखंड के उत्तरी पूर्वी अंचल में विंध्याचल पर्वत की शैलशिखरों के मध्य सुरम्य सुषमा से परिपूर्ण कालिंजर श्रेणी है जो भगवान नीलकण्ड का धाम है। कालिंजर पर्वत के पश्चिमी पाश्र्व के मध्य में भगवान नीलकण्ड का गुफा मंदिर है पर्वत को तराशकर गुफा मंदिर एवं सरोवरों का निर्माण मानवीय बुद्धि एवं शिल्प कौशल का अदभुत चमत्कार यहां देखने को मिलता है कालिंजर शिखर के चारो ओर मैदानी क्षेत्र है मैदान के चारो ओर प्राकृतिक पर्वत परकोटा है जो कालिंजर की सुरक्षा के स्थाई प्राकृतिक प्रहरी के स्वरूप दर्शनीय है। सपाट शीर्ष पर ऊँचा एवं चौड़ा कृतिम परकोटा है मानो कालिंजर पर्वत श्रेणी साफा बांध दिया गया हो किले में प्रवेश के लिए श्रेणी के बॉय ओर के अंग के सहारे कॉटी बनायी गई सीढियों से सात दरवाजों को पार करना होता है। प्रत्येक दरवाजे पर सुरक्षा चौकियॉ भी निर्मित है। िवंध्यशैल से शिखरों से घिरे घेरे के मध्य कालिंजर किला है जिसकी उत्तरी तलहटी में बस्ती हैं बस्ती परकोटे के अंदर है। जिसके तीन दरवाजे पूर्व, उत्तर एवं पश्चिम दिशाओं में है। चौथा दरवाजा किला का प्रथम दरवाजा है यहां की कृषि भूमि जो किले के चारो ओर है समतल और उपजाऊ है। कालिंजर के किले के पश्चिमी पाश्र्व के मध्य में नीलकण्डेश्वर शक्तिपीठ है जिसकी खिड़की फाटक से नीचे कटरा मुहल्ला में उतरा जा सकता है। |
