किला मोहनगढ़ :–मोहनगढ़ का किला मोहनगढ़ ग्राम के पश्चिमी अंचल के पहाड़ी के पूर्वी भाग पर 25–00 उत्तरी आंक्षाश के 78–47 पूर्वी देशांतर पर स्थित है मोहनगढ़ किला टीकमगढ़ के पश्चिमी अंचल में है। टीकमगढ़ से मोहनगढ़ यातायात सुलभ है पहले यहां आना जाना बड़ा कठिन था क्योंकि वनांचलीय क्षेत्र से आया जाया जाता था अनेक नाले पार करना पड़ते थे एक नाला तो ऐसा था जिसे सात वार पार करना पड़ता था मोहनगढ़ किला का मुख्य दरवाजा तालाब मोहनगढ़ और बस्ती मोहनगढ़ की तरफ यह पहाड़ी पर लम्बाकार उत्तर से दक्षिण की ओर फैला है किला की रचना बहुत अच्छी है। यहां के किले की चार गुर्जो पर तोपे चढ़ी रहती थी। किला इतना सुरक्षित सुदृण रहा है कि इसमें शत्रु प्रवेश ही नहीं कर सकता। यह किला ओरछा के महाराजा उदोदत सिंह ने बनवाया था। किले में देवी मंदिर, विष्णु मंदिर है जिसमें विष्णु और लक्ष्मी की अद्वितीय प्रतिमा है इस दुर्ग में मणिमाला चित्रकारी है कालांतर में इस किले में खनियॉधाना के जागीरदार अमरेश एवं उनके पुत्र मानसिंह रहने लगे थे। महाराज सिंह जो मान सिंह का पुत्र था इस किले में रहने लगे थे परन्तु यहां रहते हुये महाराज सिंह ने ओरछा राजा के खिलाफ गैर क्षेत्रीय मराठो से सम्पर्क किया तो ओरछा के महाराजा विक्रमाजीत ने अपनी फौज भेजकर महाराज सिंह को मोहनगढ़ से खदेड़कर खनियॉधाना भगा दिया था मोहनगढ़ का किला दर्शनीय किला है। |