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किला टीकमगढ़ :–

टीकमगढ़ किला 24–45 उत्तरी अक्षंस एवं 78 – 5 पूर्वी देशांतर पर एक छोटी सी पहाडी पर स्थित है। टीकमगढ़ का किला नगर के पूर्वी भाग में पहाडी पर सि्​िात है। जिसके चारों ओर पक्का परकोटा है। परकोटा के बाहर खाई है। यह दुर्ग लगभग 20 ऐकड़ क्षेत्र में होगा। दुर्ग वास्तु स्थापत्य एवं सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा है। यह गिरि दुर्ग है। इसका मुख्य द्वार पश्चिम दिशा की ओर है। जो तोपखाने के घंटाघर के पास एक टेडे – मेडे रास्ते पर खुलता है। दरवाजा बहुत ऊंचा है। जिसे हांथी दरवाजा कहतें रहे है। इसे कीला दरवाजा भी कहतें है। किले के अंदर अनेक मंदिर, भव्य आधुनिक प्रसार एवं किले है किले के अंदर तीन चौक है किला बहुत सुदृण एवं दर्शनीय है। किले के बाहर परकोटे में जलेबग्राई आदि सैनिकों की टुकडियां पहरेदार एवं सैनिक जवान रहा करते थे।

दक्षिणी पश्चिमी भाग में बाबा रहमतुल्लाह अलैह साहब की मजार है उत्तर की ओर गुरईया माता का मंदिर है। किला चौक जिले वर्तमान में राजेन्द्र पार्क कहा जाता है उसमें तोपखाना, बघ्घीखाना था किले दरवाजे के उत्तरी पाश्र्व में नजरबाग बगीचा था जिसमें गरई रानी का बनवाया एक मंदिर है जिसे नजरबाग का मंदिर कहा जाता है। वर्तमान में इस परिसर में कन्या हायर सेकेण्डी विद्यालय है । दक्षिण की तरफ खिडकी दरवाजा रहा है। जिसके सामने प्रतापगढ़ राज्य सचिवालय रहा है। इसमें राज्य के दीवान, प्रधानमंत्री का कार्यालय और अन्य सभी कार्यालय थे।

 
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