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15 जुलाई 2011

सीएनएन-आईबीएन

केंद्र सरकार द्वारा बुंदेलखंड के किसानों के लिए सात हजार करोड़ का पैकेज दिए किए के बावजूद बुंदेलखंड में किसानों की स्थिति में सुधार नहीं हुआ है। पिछले पांच महीनों में 500 से ज्यादा किसानों की खुदकुशी के आंकड़े तो यही संकेत देते हैं कि सरकारी पैकेज पर बुंदेलखंड की गरीबी भारी पड़ रही है।

हाल ही में बैंक से लिया कर्ज चुका पाने में असमर्थ 45 वर्षीय वीरपाल राजपूत के आत्महत्या का मामला प्रकाश में आने के बाद बुंदेलखंड में आत्महत्या करनेवाले किसानों की संख्या पिछले 5 माह में 519 तक पहुंच गई है।

यह क्षेत्र पिछले आठ साल से सूखे और अकाल से जूझ रहा है। प्राकृतिक आपदा के कारण खेती का काम ना के बराबर हो रहा है, जिसकी वजह से यहां पिछले 10 सालों में 2945 किसानों ने खुदकुशी की है।

उत्तर प्रदेश में किसानों के नाम पर जोर-शोर से राजनीतिक जंग लड़ी जा रही है। लेकिन किसानों की हालत बद से बदतर होती जा रही है। गौरतलब है कि केंद्र ने बुंदेलखंड के किसानों के लिए सात हजार करोड़ का पैकेज दिया था।

 

मासूम पूछ रही है, पापा को आखिर हुआ क्या है?

 

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने खुद बांदा पहुंच कर किसानों के लिए पैकेज की घोषणा की थी। राहुल गांधी ने माया सरकार पर पैकेज का पैसा बुंदेलखंड में खर्च न करने का आरोप लगाया था। उधर, मायावती हर बार इस पैकेज को ऊंट के मुंह में जीरा बताते हुए 80 हजार करोड़ का पैकेज मांग रही हैं। पर किसान शायद राजनीति के इस खेल से बेजार हो चुका है। यही वजह है कि कुछ सालों में बुंदेलखंड के हजारों किसान मौत को गले लगा चुके हैं। सवाल यह है कि आखिर इसका जिम्मेदार कौन है?

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