(१) हीरा- हीरा उत्पादन में मध्य प्रदेश का भारत में प्रथम स्थान है हीरा अधात्विक खनिज है यह बड़ा कठोर होता है,मध्य प्रदेश में हीरा की प्रख्यात खान कैमूर श्रेणी के बालुकाश्म के अपर बलुई संगुस्तिकश्म स्तर में पन्ना के चतुर्दिक स्थित है ! इस क्षेत्र की मझगुवां की खान विशेष उल्लेखनीय है एक अनुमान के अनुसार छतरपुर (chhatarpur) तथा बिजावर तह्शीलों तक विस्तृत है! (अ) पन्ना जिले में पन्ना और हिनोता की प्रमुख खाने है पन्ना में संगुस्तिकास्म में विभिन्न स्तरीय होरायजन पाए जाते है जिनमे हीरा होता है! (बी) छतरपुर (chhatarpur) जिले में अन्गौरा में हीरा प्राप्त होता है इन तीन क्षेत्रों का विस्तार ९७ किलोमीटर लंबा तथा १६ किलोमीटर चौड़ा है ! हीरा की प्रमुख किस्में जैसे कोहेनूर, महँ मुग़ल पिट और लोक आदि इसी क्षेत्र में प्राप्त हुए हैं! मध्य प्रदेश के पन्ना में आगेन नदी द्वारा बनाये गए ढेर में रामखेरिया नामक स्थान पर १२ से १८ मीटर की गहराई से हीरे प्राप्त होते है इनका वार्षिक उत्पादन ११,००० केरेट है इसमें ५०-६० प्रतिशत जवाहरात क़िस्म का हीरा होता है! राम खेरिया में हीरा में अनुमानित भंडार ११,५ ००० केरेट के है पन्ना की ही खानों से नागों एवं ओद्योगिक कार्यों के उपयुक्त पत्थर प्राप्त होता है! (२) तांबा- नरसिंहपुर ,सागर ,छतरपुर (chhatarpur) (३) सीसा अयस्क - दतिया और शिवपुरी (४) बैराइटिस - नरसिंहपुर ,शिवपुरी और टीकमगढ़(tikamgarh) (५) अभ्रक - नरसिंहपुर और टीकमगढ़(tikamgarh) (६) एस्बेस्टस - नरसिंहपुर और टीकमगढ़(tikamgarh) (7) अग्निरोधी मिटटी- - नरसिंहपुर और पन्ना (८) सेलखड़ी - नरसिंहपुर (९) चूना पत्थर - सागर, कटनी ,छतरपुर (chhatarpur) , दमोह ,पन्ना ,शिवपुरी और नरसिंहपुर (१०) गेरू -छतरपुर (chhatarpur) , दतिया ,शिवपुरी (११) राक- फास्फेट - सागर और छतरपुर (chhatarpur) (१२) कोयला - नरसिंहपुर
बुंदेलखंड (bundelkhand) को प्रथक राज्य बना दिया जाए तो यह अपने आप में समर्थ राज्य होगा इसे केंद्रीय सहायता की भी जरूरत नही पड़ेगी ।बुंदेलखंड (bundelkhand) एकीकृत पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक संजय पाण्डेय ने कहा कि कुछ लोग बुंदेलखंड (bundelkhand) राज्य निर्माण का विरोध सिर्फ़ इसलिए करते है कि बुंदेलखंड (bundelkhand) अभी संसाधनों के हिसाब से आत्म निर्भर नही है ,किंतु उनका सोचना एक दम ग़लत है । पाण्डेय ने कहा कि बुंदेलखंड (bundelkhand) में सम्पदा भरपूर है , इसलिए यदि इसे अलग राज्य बना दिया तो यह देश का सबसे विकसित प्रदेशों में से एक होगा ।
संजय पाण्डेय के अनुसार :-बालू से लेकर हीरा और यूरेनियम तक के भण्डार है बुंदेलखंड (bundelkhand) में।लगभग ५००० वर्षों से पन्ना क्षेत्र हीरा उत्पादन के लिए विश्व-विख्यात है। अब यहां हिनौता, मझगवां तथा छतरपुर (chhatarpur) जनपद के अंगोर नामक स्थान में भी हीरा प्राप्त होने की संभावना है। उत्पादन क्षेत्र विस्तृत हुआ है। लगभग ४०००० कैरेट हीरा निकाला जा चुका है और १४००००० कैरेट के भण्डार शेष है। नई खदानों में से इतना ही प्राप्त होने की संभावना हैं। सन् १९६८ ई० में नेशनल मिनरल डेवलमेन्ट कॉर्पोरेशन पन्ना द्वारा यांत्रिक प्रक्रिया से ६२ मीटर गहरी खुदाइ की जा चुकी है। पन्ना में वार्षिक उत्पादन २६००० कैरेट हीरा है, जिससे करोडो रुपये की रॉयल्टी प्रान्तीय सरकार को प्राप्त होती है। बुंदेलखंड (bundelkhand) में वास्तु पत्थर के अक्षय भण्डार हैं। बालू का पत्थर आदि काल से अपने सुहावने रंगों, एक समान कणों नियमित संस्करण, सुगम सुकरणीयता तथा चिरस्थायित्व के लिए समूचे उत्तर भारत में वास्तु पत्थर के रुप में प्रसिद्ध है। यहाँ के ग्रेनाइट पत्थर की विदेशों में विशेष कर जर्मनी, जापान, इटली में इसकी बड़ी मांग है। कांच उद्योग में प्रयोग होने वाली बालू के निक्षेप इतने बड़े हैं कि सम्पूर्ण भारत की मांग ८० प्रतिशत यहीं से पूरी हो सकती है। अनेक स्थानों में सिलिका की मात्रा ९९.२ प्रतिशत है। प्यालियों के निर्माण में गोरा पत्थर कई स्थानों में प्रचुर मात्रा में मिलता है। इसके ज्ञात निक्षेपों का आंकलन ४३ लाख टन किया गया है। अन्य भण्डारों का सर्वेक्षण शेष है।अभी हाल में बुंदेलखंड (bundelkhand) के बांदा जनपद और उनके समीपस्थ क्षेत्रों में एल्यूमीनियम अयस्क बॉक्साइट के बृहद भण्डार का पता चला है। यह निक्षेप प्रति वर्ष एक लाख टन एल्यूमीनियम उत्पादन की क्षमता वाले कारखाने को कम से कम ३५ वर्षों तक अयस्क प्रदान कर सकता है।बुंदेलखंड (bundelkhand) के छतरपुर (chhatarpur) जनपद में चूने के पत्थर प्रचुर भण्डार हैं, अन्य स्थानों में सर्वेक्षण शेष है। बांदा जनपद में झोंका भट्टी के उपयुक्त गालक श्रेणी के डोलोमाइट का आंकलित निकाय लगभग ६० करोड़ टन से अधिक है। मृतिका शिल्प की उपयुक्त सफेद चिकनी मिट्टी के बृहद भण्डार है। ज्ञातव्य निक्षेपों का आकलन ५ लाख टन से अधिक है। बांदा जनपद के लखनपुर खण्ड में यह २ लाख टन से अधिक है। बुंदेलखंड (bundelkhand) में पाए जाने वाले खनिजों में फोस्फोराइट, गैरिक जिप्सम, ग्लैकोनाइट, लौह अयस्क, अल्प मूल्य रत्न आदि हैं। संभावित खनिजों कीसूची में तांबा, सीसा, निकिल, टिन, टंगस्टन, चांदी, सोना आदि। इन्ही दिनों बुंदेलखंड (bundelkhand) में सोने के विशाल भण्डार की खबरें भी समाचार पत्रों में पढने को मिली ।बुंदेलखंड (bundelkhand) के एक बड़े भू-भाग चौरई में ग्रेनाइट चट्टानें पाई जाती हैं। यह चट्टानें अधिकतर रेडियोधर्मी यूरेनियत युक्त होती हैं तथा इसकी मात्रा ३० ग्राम प्रति टन तक हो सकती है। बुंदेलखंड (bundelkhand) में सीसा अयस्क, - गैलिना - टीकमगढ़(tikamgarh) जिले में बन्धा बहादुरपुर तथा दतिया जनपद में पए जाते हैं। टीकमगढ़(tikamgarh) जिले में ग्रेनाइट पॉलिकिंशग का कारखाना स्थापित किया जा सकता है। विदेशों में मिरर पॉलिश हेतु बहुत मांग है। दतिया, टीकमगढ़(tikamgarh), छतरपुर (chhatarpur) जिले में पायरोंफायलाइट, - पोतनी माटी - औद्योगिक दृष्टि से उपयोगी है। एस्वेस्टेस तथा निकिल की प्राप्ति सागर जनपद में है। लौह अयस्क टीकमगढ़(tikamgarh), छतरपुर (chhatarpur) , सागर जिले में प्राप्त हैं। ताम्र अयस्क के भण्डार छतरपुर (chhatarpur) , बॉक्साइट के भण्डार पन्ना, सागर तथा मणि पत्थर दतिया में प्राप्त हैं।लौह अयस्क के भण्डार मानिकपुर - कर्बी-, बेरवार - बेरार - ललितपुर (lalitpur) में अनुमानतः १० करोड़ टन खनिज के हैं। इसमें ३५ से ६७ प्रतिशत लौह प्राप्त हैं जो स्पंज आयरन हेतु उपयोगी है। सोनरई - ललितपुर (lalitpur) - में ४०० मीटर से १००० मी। लम्बे तथा १ से ३ मीटर मोटे ताम्र अयस्क भण्डार हैं, जिनमें ०.५ प्रतिशत तांबा है। शीशे के बालू, बरगढ़ - कर्वी - में अनुमानतः ५ करोड़ टन है जो विभिन्न स्तरीय है। नरैनी - बांदा में स्वर्ण की प्राप्ति २ ग्राम प्रति टन है। बॉक्साइट भण्डार बांदा में ८३ टन अनुमानित है।कहने का तात्पर्य है कि बुंदेलखंड (bundelkhand) आर्थिक संसाधनों के लिहाज से किसी भी भारतीय प्रदेश से पीछे नही है। इसलिए बुंदेलखंड (bundelkhand) एकीकृत पार्टी का तर्क है कि बुंदेलखंड (bundelkhand) को अलग राज्य बनाने की स्थिति में यहाँ संसाधनों की कमी नही होने पायेगी। |