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कुण्डेश्वर :–

टीकमगढ़(tikamgarh) जिला मुख्यालय से दक्षिण की ओर ललितपुर (lalitpur) बस मार्ग पर 6 किमी. की दूरी पर कुण्डेश्वर तीर्थ धाम है। यह जमड़ार नदी के तट पर है नदी के दाये तट पर कुण्डकोठि एवं आशुतोष भगवान कुण्डेश्वर (कूडा देव) का विशाल आकर्षक मंदिर है। उत्तरी भाग में धर्मशालाएँ है। कुण्डेश्वर धाम बुंदेलखंड (bundelkhand) का दर्शनीय तीर्थ स्थल है। यहाँ बगीलचे के अंदर कोठि में बनारसी दास चतुर्वेदी महान साहित्यकार रहा करते थे। जो ओरछा (orchha) शासनकाल में प्रसिद्ध साहित्यिक पत्रिका निकालते थे, वहीं इसके संपादक थे वर्तमान में उनके निवास स्थान बगीचे में डाइट जिला शिक्षा प्रशिक्षण केन्द्र है, उसी के पास जवाहर नवोदय विद्यालय है। सड़क मार्ग पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्वर्गीय सरदास सिंह की प्रतिमा स्थापित है। नदी के पार सुंदर बाग–बगीचे, खैराई नामक बहुत सुंदर वन है जिसमें चंदन के वृक्ष है प्राकृतिक सुषमा से भरपूर कुण्डेश्वर का प्रपात भी दर्शनीय है। प्रपात के नीचे बरीधाट एक स्थान है जहाँ की नदी से टीकमगढ़(tikamgarh) नगर को पीने का पानी दिया जाता है। बरीधाट बहुत सुन्दर पिकनिक खांट है कुण्डेश्वर में मकर संक्रांति के अवसर पर बहुत विशाल मेंला लगता है। शिवरात्रि के अवसर पर बहुत विशाल मेला लगता है। शिवरात्रि के अवसर पर भी कुण्डेश्वर में अपार भीड़ वाला मेला लगता रहा है। सैकड़ो लोग नित्य पूजा उपासना के लिए एवं सैलानी तीर्थ यात्री यहाँ आते है और यहाँ के प्राकृतिक रमणीक, मनमोहक वातावरण से मुग्ध होते है।
 

पर्यटन स्थल ओरछा (orchha) :–

बुंदेलखंड (bundelkhand) क्षेत्र का एक अद्वितीय पर्यटन केन्द्र ओरछा (orchha) है जो बेतवा नदी के बायें तट पर है। यहाँ का किला महाराजा रूद्रप्रताप सिंह ने 1531 ई. ने बनवाया था। यह किला बेतवा नदी की 2 धाराओं के मध्य एक द्वीप पर बना हुआ है। किले के अंदर राजमंदिर, दीवानखाना, दर्शनीय ईमारतें है, इनकी चित्रकारी देखते ही बनती है। रामायण, महाभारत आधारित चित्रकारी से पूरा राजमंदिर का आंतरिक भवन चित्रित है। दीवानखाने की चित्रकारी भी दर्शनीय है राजमंदिर से संलग्न उद्योत भवन जिसे वर्तमान में शीशमहल कहते है दर्शनीय भवन है। इन्हीं के आगे महाराजा वीर सिंह देव का बनवाया महाराजा जहांगीर महल है। यह महल वर्गाकार है, महल के दोनों ओर निराले हुज्जे है मध्य में कमरे है यह महल 5 मंजिला है प्रत्येक कमरे से नीचे ऊपर जाने के लिए सीढि़यां है। जो गुप्त सी दीवालों के बीच से है। इस महल के कमरों के यह विशेषता है कि किसी भी एक कमरे में बैठिये तो बैठने वाले बाजू के पूरे कमरों की गतिविधियों को आप देख सकते है। एक समान चारों तरफ बना हुआ है। महल के ऊपर भाग में सुंदर मडियां बनाई गई है महल के द्वार बड़े–बड़े पत्थर के हाथियों से युक्त है। पत्थर की मूर्तियां, पत्थर पर उकेरी चित्रकारी, बेंले सब कुछ अजीब दर्शनीय है। यह दर्शनीय अनूठा महल है। जहाँगीर महल के आगेएक इमारत है जिसे ऊँट खाना बोलते है यह भव्य इमारत है। उसी के बाजू में शिव मंदिर है जिसके नीचे विशाल हमामखाना है। हमामखाने के आगे राय प्रवीण महल है, उसी के प्रांगण में भव्य बगीचा है शिव दरवाजा और हाथी दरवाजा बड़े–बड़े दरवाजे है। किले के अंदर से बाहर रामराजा मंदिर बुंदेलखंड (bundelkhand) का एक मात्र पुराना राजवाड़ी रामचंद्र जी का मंदिर है। जिसमें रामचंद्र जी, सीता और लक्ष्मण का प्रारंभिक प्राचीन मूर्तियां है संमवत इनसे प्राचीन मूर्तियां अनयत्र नहीं है। भगवान रामराजा मंदिर रानीमहल में है जिसका भव्य प्रांगण है। इसी प्रांगण में अनेक मंदिरों सहित दांयी ओर अद्वितीय मूर्तियां का एक संग्रहालय है। भगवान रामराजा के दर्शनों हेतु दूर–दूर से हजारो लोग नित्य आते जाते है।
 

चतुर्भुज मंदिर :–

चतुभु‍र्ज मंदिर महाराजा वीरसिंह देव का बनवाया एक विशाल चबूतरे पर है। जो पंचायतन शैली का बहुत ऊँचा है।

स्मारक :–

बेतवा नदी के तट पर ओरछा (orchha) नरेशों के स्मारक है जो कंचना धाट पर है यहाँ नदी का दृश्य मनमोहक है। जो भी शैलानी आता है ओरछा (orchha) नगर का स्थापत्य चित्रकारी और नदी तट का प्राकृतिक सौंदर्य निहार कर अभिभूत हो जाता है। शैलानी नदी के किनारे–किनारे सधन वनों का भ्रमण कर मुदित होते है। यहाँ की प्राकृतिक सुशमा देखकर वरवश ओरछा (orchha) खिंचे चले आते है।
 

राहतगढ़ प्रपात पर्यटन वन :–

राहतगढ़ भोपाल मार्ग पर राहतगढ़ से कुछ ही दूरी पर मध्यप्रदेश वन विभाग द्वारा राहतगढ़ वन से अंदर बीना नदी का एक प्राकृतिक प्रपात है नदी बहुत ऊपर से नीचे को गिरती है। यह प्रपात बहुत सुंदर है प्रपात के पास नदी में बड़ी–बड़ी चट्टाने पठार है। जिन पर बैठकर लोग प्रपात का आनंद लेते है। प्रपात से किले का सौन्दर्य अति मनोहरी लगता है। नदी के किनारे–किनारे वन विभाग ने जगह–जगह फूलों की बेलें लगाकर मनोहारी बगीचा सा बना रखा है और जगह–जगह बैठकें बना दी गई है। जहाँ से प्रपात की जल–जल की आवाज बड़ी मधुर लुहावनी लगती है और पत्थरों से टकराती जलधार मानों पत्थरों से अठखेलियाँ करती जल–जल की आवाज करते हुये प्रवाहित रहती है। यह राहतगढ़ वन प्रपात बड़ा सुहावना है। आकर्षक है दूर–दूर से सैलानी इस पिकनिक प्वांइट पर आते रहते है।
 

पांडव प्रपात पन्ना, नेशनल पार्क पन्ना, स्नेह फॉल, खजुराहो (छतरपुर (chhatarpur) ) :–

पर्यटन स्थल खजुराहो बुंदेलखंड (bundelkhand) जनपद का खजुराहो एक विश्व पर्यटन स्थल है यह खजुराहो छतरपुर (chhatarpur) जिला अन्तगर्त केन नदी के कछरिय क्षेत्र में स्थित है। यहां आने जाने के लिये खजुराहो हवाई अड्डा भी है एवं दिल्ली, झाँसी (Jhansi), जैसे दूरस्थ स्थनों से भी बसों द्वारा आया जाया जाता है। भोपाल ग्वालियर से सीधी बसें प्राप्त होतीं है। यहां ठहरने के लिये 5 सितारा, 3 सितारा और सभी प्रकार के आवासों की सुविधा व्यवस्था है। यहां 950 – 1050 ई. के मध्य चंदेल राजाओं द्वारा निर्मित मंदिर है जिनकी संख्या अब लगभग 22 – 25 है। परंतु कहा जाता है कि पहले यहां 85 मंदिर थे। खजुराहो के मंदिर प्रस्तर कला, वास्तु स्थापत्य, मूर्ति कला और मानवीय क्रिया कलापों वाली मूर्तियों, देवीयों की विश्व में बेजोड कला का चित्रांकन इन मंदिर समूह में है। मंदिर उत्तुंग शैल शिखरों वाले है, भव्य है, विशाल है, ऊँची छैंकन (आसन) पर निर्मित है। मंदिरों को देखने से ऐसा आभास होता है कि क्या मनुष्य ऐसी इतनी क्रियाऐं करता है। क्या ऐसा निर्माण कर सकता है। मनुष्य के बनवाये है, अथया किसी देवी विश्वकर्मा के बनवाये है, पत्थर को मानो मोम सा पिघलाकर बनाया गया है। कोई भी जो इन मंदिरों को देखता है, इनके शिल्प को निहारता है, तो स्तब्ध रह जाता है, विश्व में स्थापत्य कला और वास्तुशिल्प के यह अद्वितीय मंदिर है। खजुराहों के समीप उत्तरपूर्व में स्नेह ग्राम में केन नदी का स्नेह प्रयासत भी खजुराहों केन्द्र से देखा जा सकता है। यहाँ केन नदी ऊंचे स्थान से उत्तर की ओर गिरती है, जिसकी जलधारा छरछराती हुई अवतरित होती है।यह प्रपात बड़ा मनोहारी व दर्शनीय है। खजुराहों केन्द्र से ही केन नदी के आसपास से संलग्न राजगढ़ पैलेस प्राचीन दर्शनीय महल है, जो मनियागढ़ पर्वत की उत्तरी तराई है, स्थित है। यह वनांचलीय महल महलवास्तु का उत्कृष्ट उदाहरण है। जिसके समीप 3–4 तालाब है, मनियादेवी का गुफा मंदिर है, इस अदभुत पुरास्थल देखने के पश्चात केन नदी के पारकर पर्यटक पन्ना जिला के मण्डला क्षेत्र में पहुंचकर पन्ना राष्ट्रीय अभ्यारण्य में प्रवेश करते है। यह पन्ना राष्ट्रीय अभ्यराण्य क्षेत्र 543 वर्ग किलोमीटर का है। ऊंची–नीची वनाच्छादित घाटियां जिनमें वनविहार करते बाध, चीतल, साभर, नीलगाय, तेंदुआ और भालू भारी संख्या में विचरण करते है। यह पन्ना राष्ट्रीय उद्यान दर्शनीय है। पर्यटकों को राष्ट्रीय उद्यान भ्रमण की पूर्ण सुविधा है। यदि और अवसर समय है, तो खजुराहों केन्द्र से ही पन्ना जिसे मंदिरों की नगरी, हीरो की खान कहा जाता है। हीरा की खदाने देखी जा सकती है। यदि सुरमा वादियों, घाटियों का आनंद उठाना है, तो पन्ना के उत्तर में 25–30 किलोमीटर विचित्र घाटी चढ़ाई चढ़ते हुए अजयगढ़ का रंगमहल और भगवान भूंतेश्वर के दर्शन किये जा सकते है। अजयगढ़ का रंगमहल तो दूसेर खजुराहों ही है, इस प्रकार बुंदेलखंड (bundelkhand) के खजुराहों परिक्षेत्र के प्रत्येक टौरिया, पहाड़ी, वास्तुशिल्प से मुक्त है। क्षेत्र प्राकृतिक छटा सौन्दर्य और सुषमा से भरपूर है। केवल व्यक्ति को समय हो। इसके अलावा आप पन्ना की घाटी में पहाड़ों से झरझराते झरने देखते ही रह जायेंगे। पांडव प्रताप को देखने की प्रत्येक पर्यटक को उत्कंठा ही रहती है। पहाड़ी घाटियों के मध्य यह स्थल अतिविचित्र है। प्रपात है, गहरा प्रपात है, जिसमें पहाड़ी जल धारा झरझराती बढ़ती है। जिसके चारों तरफ बैठके है। प्राकृतिक सौन्दर्य तो पांडव प्रपात में हैं ही मानव ने भी अपनी बुद्धि लगाकर इसे सौन्दर्य में अभिवृद्धि कर दी है।
 

पर्यटन केन्द्र शिवपुरी :–

बुंदेलखंड (bundelkhand) के पश्चिमी दक्षिणी क्षेत्र में शिवपुरी प्रसिद्ध पर्यटन क्षेत्र है यहाँ पहुँचने के लिए झाँसी (Jhansi)–ग्वालियर हवाई अड्डों, सडक मार्गो द्वारा पहुँचा जा सकता है। शिवपुरी में संदर राजप्रसाद है जो गुलाबी पत्थर से निर्मित माधवविलास प्रसाद कहा जाता है। यहाँ ग्वालियर के महाराजाओं की संगमरमर पत्थर से निर्मित अतिसुंदर छतरियां है। यहां का जार्ज कैशिल, संख्या सागर वोर्ट क्लब, मदैया कुंड और तात्याटोपे की मूर्ति दर्शनीय है। शिवपुरी बाग बगीचों की नगरी है। शिवपुरी में रहते हुए पर्यटक माधौ राष्ट्रीय उद्यान का भ्रमण कर सकता है। जो 156 किलोमीटर क्षेत्र का है। इसमें शेर, हिरण, चिंकारा, कलंपूछ, चीतल, नीलगाय, साभर, चौसिंधा, कालाहिरण, रीछ, चीते और नाना प्रकार के बंदर एवं वन्य प्रकार है। अभयारण्य मे धूमने के लिए अभयारण्य विभाग से उपयुक्त साधनों की व्यवस्था रहती है। शिवपुरी पर क्षेत्र में विश्व में विलोपित होता। एक पक्षी गौडावन यहां–यहां जब कभी दिखाई देता है। देखने का मिल सकता है, यदपि इनकी संख्या कम हो गई है। परंतु गौडावन पक्षी विलुप्त नहीं है, जो मांधव राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र में अथवा आस–पास के वनांचलीय क्षेत्रों मे उसके दर्शन हो जाते है।