असगरीबाई (1918 – August 9, 2006)असगरीबाई एक प्रसिद्ध भारतीय ध्रुपद गायिका थी, उनको पद्मश्री, तानसेन सम्मान, अकादमी सम्मान और शिखर सम्मान भी दिए गए थे उनको नारी शक्ति सम्मान से सम्मानित किया गया और भी कई पुरस्कार असगरीबाई को दिए गए ! असगरीबाई को न केवल मध्य प्रदेश बल्कि पुरे भारत में ध्रुपद गायिका के रूप में जाना जाता है!और असगरीबाई ध्रुपद गायिका के रूप में उसकी शैली दशकों के लिए प्रतिभा के साथ न केवल मध्य प्रदेश में बल्कि देश भर में अद्वितीय थी ! प्रारंभिक जीवन और पृष्ठभूमि असगरी बाई बिजावर,छतरपुर (chhatarpur) में पैदा हुई थी! बाद में उनको अपनी माँ नजीर बेगम के साथ टीकमगढ़(tikamgarh) आना पड़ा, उसकी माँ बिजावर के पूर्व शाही परिवार के लिए एक गायिका थी, जबकि उसकी दादी बलायत बीबी अजयगढ़ रियासत के दरबार में गायिका थी ! एक शाही गायक असगरी बाई ने अपना गुरु ज़हूर खान को बनाया जो गोहद भिंड के निवासी थे असगरी बाई टीकमगढ़(tikamgarh) राज दरबार में करीब ३५ साल तक रही ! ओरछा (orchha) राजवंश के लिए मुख्य गायक के रूप में अस्गारिबाई ने ध्रुपद में असाधारण विशेषज्ञता हासिल कर ली! असगरी बाई के संगीत को सुनने के लिए कई शाही परिवारों द्वारा आमंत्रित किया गया था ! निजी जीवनअसगरी बाई ने आगरा के चिमनलाल गुप्ता के साथ 35 वर्ष की उम्र में शादी की थी! उनके ५ बेटे और ३ बेटियां हैं ! असगरीबाई का निधन बुधवार को ९ अगस्त, २००६ में हो गया! पुरस्कार असगरीबाई को 24 मार्च 1990 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया! वह फरवरी 1987 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया, और तानसेन सम्मान के साथ मध्य प्रदेश सरकार द्वारा दिसम्बर 1985 में सम्मानित किया गया और फरवरी 1986 में शिखर सम्मान दिया गया ! | | Asgari Bai |
|  | | Born | 1918 | | Origin | Chhatarpur district, Madhya Pradesh, India | | Genres | Hindustani classical music, Mewati Gharana | | Occupations | Classical Vocalist | | Years active | 1937 - 2005 |
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