banner

Joomla Slide Menu by DART Creations

Translate

Valid XHTML

Valid CSS!

Share

Loading
Bundelkhand Atishay Jain Tirth Patnaganj Sagar Madhya Pradesh PDF Print E-mail
Written by Yatindra Joshi   
Monday, 28 February 2011 06:38

अतिशय जैन तीर्थ पटनागंज

मध्यप्रदेश में सागर शहर से लगभग 40 किलोमीटर दूर रहली में पटनागंज अतिशय दिगम्बर जैन क्षेत्र विद्यमान है। रेल से आने वाले तीर्थ-यात्रियों को मध्य रेलवे के बीना कटनी रेल से सागर पहुँचना चाहिये। जबलपुर से भी रहली के लिये सीधी बस सेवा उपलब्ध रहती है।
पटनागंज जैन क्षेत्र स्वर्णभद्रा नदी के तट पर मंदिरों के उत्तंुग शिखरों सहित शोभायमान है।

इतिहास

ऐतिहासिक दृष्टि से यह जैन 7-8 सौ वर्ष प्राचीन है। पटनागंज में 11वीं से लेकर 13वीं शताब्दी तक शताब्दी तक की मूर्तिकला दर्शनीय है। यहाँ का सुंदर सहस्त्रकूट चैत्याकूट गुप्तोत्तर काल का प्रतीत होता है।
एक लम्बे अंतराल तक यह प्राचीन जैन क्षेत्र उपेक्षा का शिकार रहा। आजादी के पूर्व 1944-45 में जब प्रातः स्मरणीय पूज्यपाद संत गणेशप्रसाद जी वर्णी जी बुंदेलखंड़ में शिक्षा के प्रचार-प्रसार के क्षेत्र में दैदीप्यमान नक्षत्र की तरह सदैव ज्योतिर्मय रहे हैं। उन्होने यहाँ जैन गुरुकुल की स्थापना कराई थी और जिनालयों के जीर्णोद्वार करने हेतु समाज को प्रेरित किया था।

पुरातत्व

पटनागंज जैन क्षेत्र में विशाल 7 जैन मंदिर और 19 लघु मंदिर विद्यमान हैं। मूलनायक तीर्थंकर महावीर स्वामी की प्रतिमा 13 फुट 7 इंच ऊँची,पद्मासन मुद्रा में हैं। यहाँ इन्हें ’बड़े देव’ कहते हैं।
तेइसवें तीर्थंकर पाश्र्वनाथ स्वामी की सहस्त्र फणों युक्त दो प्रतिमायें 4 फुट 4 इंच गुणा 2 फुट 7 इंच की संवत् 1842 की प्रतिष्ठित हैं।
यहाँ का एक हजार आठ मूर्तियों जड़ित 9 फुट ऊँचा और 32 फुट वृत्ताकार सहस्त्रकूट चैत्यालय भगवान के 1008 रुपों का प्रतीक है। वहीं यह पुरातत्व की दृष्टि से अद्भुत है। पटनागंज में नंदीश्वर द्वीप के 52 जिनालयों की रचना भी भव्य और दर्शनीय है।
मंदिर संख्या 15 में संवत् 1472 की तीर्थंकर मल्लिनाथ की प्रतिमा पद्मासन में 3 फुट 8 इंच ऊँची है।
संवत् 1548 की एक श्वेत पद्मासन प्रतिमा तीर्थंकर पाश्र्वनाथ की 11 फणों वाली,चैबीसवें जिनालय में 4 फुट की अवगाहना पर दर्शनीय है। छटवें मंदिर में भगवान महावीर स्वामी की 4 फुट ऊँची पद्मासन प्रतिमा,कत्थई रंग की संवत् 1835 की मुख्य प्रतिमा आर्कषक है। यहीं कलचुरी शैली की दो मूर्तियाँ दायीं और बाँयी ओर खड़गासन अवस्था में,12वीं शताब्दी की विद्यमान हैं। इस वेदी पर पत्थर की 61,धातु की 10 मूर्तियाँ,पाँच मेरु और पाषाण की दो चैबीसी दर्शनीय हैं।