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अतिशय क्षेत्र गोलाकोटा


बुंदेलखंड के उत्तर-पश्चिम में चैरासी क्षेत्र, विंध्यांचल पर्वत श्रृंख्लाओं के मध्य,वेत्रवति,उर्वशी और मधुमति सरिताओं से परिवेष्ठित म.प्र. के शिवपुरी व गुना जिलों के अंचल को कहा जाता है।
इस अंचल में अनेक जैन तीर्थ-क्षेत्र दर्शनीय हैं। जैसे चंदेरी,बूढी चंदेरी, गोलाकोटा पचराई इत्यादि । शिवपुरी जिला मुख्यालय से चंदेरी जाने वाले मार्ग में खनियाधाना से दक्षिण की ओर 8 कि.मी.
व बामौर कलां से उत्तर की ओर 8 कि.मी. दूर स्थित गोलाकार पहाडी पर अतिशय दिगंबर जैन क्षेत्र गोलाकोटा (गूड़र) दर्शनीय हैं।

 

इतिहास/पुरातत्व

लगभग 2500 वर्ष प्राचीन इस जैन क्षेत्र में प्राकृतिक रमणीयता के मध्य एक विशाल जिनालय के 3 बरामदों में सहस्त्रों प्राचीन तीर्थकर मूर्तियाँ विद्यमान हैं । इनमें अधिकांश मूर्तियाँ खण्डित हैं।
मूर्ति लेखों से इनका रचना काल वि.सं. 1000 से 1200 अर्थात सन् 943 से 1143 पुष्ट होता हैं। दसवीं शताब्दी में निर्मित इन कलावेषों में से अनेक मूर्तियों को विधिर्मियों ने न केवल खण्डित किया है,
कतिपय मूर्तियाँ चोरी भी हो गई।

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