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अतिशय जैन तीर्थ क्षेत्र श्रेयांसगिरि

बुंदेलखंड़ का पन्ना जिला हीरों और मंदिरों के लिये मध्यप्रदेष ही नहीं बल्कि संपूर्ण देष में ख्यात है। पुरातात्विक संपदा के लिये पन्ना की दक्षिण दिषा में स्थित श्रेयांसगिरि,नचना का चैमुखानाथ और मोहेन्द्रा की मूर्तियाँ नाग वंषीय एवं गुप्ता कालीन प्रतीकों की बहुमूल्य विरासत हैं।

स्थिति

पन्ना जिला मुख्यालय से लगभग 65 किलोमीटर दूर देवेन्द्र नगर-सलेहा मार्ग पर सीरा पहाड़ी को वर्तमान में अतिषय दिगम्बर जैन तीर्थ क्षेत्र श्रेयांसगिरि के रुप में जाना जाता है। पन्ना पहुँचने के लिये सतना एवं हरपालपुर रेलवे स्टेषन निकट हैं। इस जैन क्षेत्र की दूरी सतना रेलवे स्टेषन से सीधी मात्र 60 किलोमीटर और उत्तरप्रदेष के झाँसी स्टेषन से 225 किलोमीटर है। हरपालपुर रेलवे स्टेषन से यह 170 किलोमीटर है।

इतिहास/पुरातत्व

नचना ग्राम क्षेत्रान्तर्गत श्रेयांसगिरि पर सीढ़ियों के बाई ओर 5 एवं दाई ओर 7 गुफा मंदिर हैं। तलहटी में एक तालाब और धर्मषालायें विद्यमान हैं। पहाड़ पर थोड़ा ऊपर चढ़ने पर ही नवनिर्मित चैबीसी के दर्षन होते हैं। और उसके ऊपर मात्र 200 सीढ़ियाँ चढ़ने पर श्रेयांस नाथ जैन मंदिर दर्षनीय हैं। इसके ऊपर लगभग तीन सौ सीढ़ियों पर गुफा मंदिर विद्यमान हैं। इन गुफाओं में जैन तीर्थंकरों की मूर्तियों में न तो उनके प्रतीक चिन्ह मिलते हैं न ही कोई षिलालेख। यह अनुमान लगाया जाता है कि यह मूर्तियाँ चंदेलकाल से पहले की कुशाणकाल या गुप्तकाल की होनी चाहिये।

प्रथम गुफा में तीर्थंकर महावीर स्वामी की मूर्ति पद्मासन मुद्रा में देषी पाशाण की अत्यंत सुंदर रचना है जिसके दोनों ओर चमरधारी इंद्र एवं नीचे सिंह बने हुये हैं।

दूसरी गुफा में खड़गासन मुद्रा में तेइसवें तीर्थंकर पाष्र्वनाथ की भव्य प्रतिमा हैं। इस मूर्ति को अनुमान से ईसा की छटवीं षताब्दी का बताया जाता हैं। इसमें षासन-देव धरणेद्र की रचना स्पश्ट है। गुफा-मंदिर नं. 3 में प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ की प्रतिमा है जो बड़े बाबा के नाम से चर्चित है। विद्याधर,चमरधारी इंद्र और यक्षों आदि की रचना के कारण यह इस क्षेत्र का सुंदरतम जिनबिम्ब है।

चैथी गुफा में खड़गासन आदिनाथ भगवान की मूर्ति थी जो कहते हैं चोरी चली गई। अब यहाँ चरणचिन्ह अंकित हैं।

पांचवीं एक मगर गुफा है जिसकी मूर्ति नीचे जिनालय में स्थापित कर दी गई है और अब केवल चरणचिन्ह ही यहाँ नमनीय हैं।

क्षेत्र में एक नवीन चैबीसी जिनालय का निर्माण तलहटी में किया गया है। मान स्तम्भ भी बनवाया गया है। धर्मषालाओं की व्यवस्था अच्छी है। एक और श्रेयांसगिरि जिनालय भी निर्मित हो गया है। क्षेत्र में विकास की अपार संभावनायें हैं, पुरा-संपदा भरपूर है।

पन्ना के जिला पुरातत्व संग्रहालय में नचना से लाई गई गुप्ताकालीन दो सुंदर प्रतिमायें प्रदर्षित की गई हैं। सतना के राम वन और पन्ना के राजेन्द्र उद्यान में भी यहाँ की मूर्तियाँ प्रदर्षित की गई हैं।

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