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अतिशय क्षेत्र बंधाजी (Atishay Kshetra Bandha Ji Tikamgarh)

900 साल काला प्रमुख देवता भगवान अजितनाथ की शानदार रंग और चमत्कारी मूर्ति प्राचीन है श्री अतिशय क्षेत्र बंधाजी के एक तहखाने में स्थापित किया है. ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक इस क्षेत्र उपलब्ध सबूतों के अनुसार 1500 से अधिक साल प्राचीन लगता है. यह जगह खूबसूरत पहाड़ियों से भरा के बीच में स्थित है प्राकृतिक और स्वच्छ एवं शांतिपूर्ण माहौल. 7 भोंयरे (basements) काफी 'बुंदेलखंड (bundelkhand) में स्थित हैं' में प्रसिद्ध हैं 'पावा', 'देवगढ़,' सीरोन जी ',' करगुवां जी ',' बंधा जी , 'पपोरा जी ' और 'थूबोन जी ,`अहार जी`! दो प्राचीन मंदिरों शिखर भी यहाँ जो कला और भव्यता के दृष्टिकोण से देखने लायक हैं का निर्माण कर रहे हैं. इस क्षेत्र काफी पुरातत्व के दृष्टिकोण से अमीर है. जैन धर्म से संबंधित महत्वपूर्ण बात बिखरा पड़ा है, जहां किसी भी क्षेत्र, पाउंड, प्राचीन किलों और पुराने मंदिरों में हैं. ऐसा लगता है कि इस जगह चंदेल राजाओं और भोंयरे(तहखाने) मुसलमान (शासकों के समय के दौरान मूर्तियों का निर्माण करने के लिए सुरक्षित रखने के लिए) के समय के दौरान विकसित की गई थी !

अतिशय

1. मुगल काल के दौरान जब मूर्तियों विध्वंसक प्राचीन मूर्तियों को 'बंधा' में नष्ट कर रहे थे फिर उनको बंधा की चमत्कारी शक्ति का एहसास हुआ और खेद महसूस किया और फिर बाद में वे उस श्राप से मुक्त हो गए और तब से यहाँ को बंधा जी का नाम दिया गया !

2. आचार्य श्री महावीर कीर्तिजी ने वर्ष 1953 में यहाँ अपने संघ के साथ दौरा किया उस समय वहाँ अच्छी तरह से में पानी नहीं था लेकिन आचार्य ने अभिषेक का जल वहां के कुओं में छिडका जिससे बंधा जी के कुओं में पानी भर गया और तब से यहाँ हर समय ही उपलब्ध है !

3. एक विशाल सर्प भी भोंयारा में रहता है और यह अक्सर देखा जा सकता है औरजो व्यक्ति नास्तिक होता है वो भोंयरे के अंदर प्रवेश नहीं कर पाता !

4. कभी कभी रात की खामोशी में भक्ति गीत, नृत्य और अन्य संगीत वाद्ययंत्र की ध्वनि सुनाई देती है !

5. एक बार एक संवत् 1890 में कलाकार मूर्तियों को बेचने के लिए 'बम्होरी जा रहा था. अचानक बैलगाड़ी बम्होरी के पास एक पीपल का पेड़ के पेड़ के पास रुक गई और उसने अनपे सभी प्रयासों को बेकार पाया और गाड़ी को आगे नहीं ले जा पाया पर जब कलाकार ने फैसला किया कि वह में मूर्ति स्थापित 'बंधाजी क्षेत्र' में स्थापित करेगा और उसकी गाड़ी बंधाजी की ओर बढ़ शुरू कर दिया यह मूर्ति अब भी बंधाजी के विशाल मंदिर में स्थापित है!

इस तरह कई चमत्कार कर यहाँ होता है !

आसपास के स्थानों:

अतिशय : क्षेत्र -


पपोरा जी, जिला - टीकमगढ़(tikamgarh)
करगुवां जी, जिला - झाँसी (Jhansi)
क्षेत्रपाल जी - जिला ललितपुर (lalitpur)

सिद्ध: क्षेत्र -

अहार जी , जिला - टीकमगढ़(tikamgarh)
सोना गिरिजी, जिला - दतिया
गिरिजी पावा, जिला - ललितपुर (lalitpur)
द्रोण गिरिजी, जिला - छतरपुर (chhatarpur)

Lord Ajitnath (Bhonyare Wale Baba), Babdhaji

Bhagwan Ajitnath

Banda Ji

Banda Ji

Banda Ji

Banda Ji

Banda Ji

bandha ji tikamgarh

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