उपलब्धियां ऽ स्मृति मंच दमोह द्वारा हास्याचार्य की उपाधि से अलंकृत । ऽ बिहारी सांस्कृतिक एवं साहित्यिक मंच, बिजावर द्वारा सम्मानित । ऽ राजा संतोष सिंह बुन्देला साहित्य परिषद, छतरपुर द्वारा सम्मानित । ऽ नूतन साहित्य परिषद, पन्ना द्वारा सम्मानित । ऽ विकल साहित्य एवं सांस्कृतिक परिषद खागा, फतेहपुर द्वारा सम्मानित । ऽ शासकीय महाविद्यालय, बिजावर जिला छतरपुर छात्र संघ द्वारा सम्मानित । ऽ मंदाकिनी साहित्य एवं सांस्कृतिक परिषद, नरदहा द्वारा प्रषस्ति पत्र एवं सम्मान । ऽ स्वतंत्रता संग्राम सेनानी जगमोहन त्रिपाठी स्मृति मंच गढ़ी पडरिया द्वारा सम्मानित । ऽ अखिल भारतीय बुन्देलखण्ड साहित्य एवं सांस्कृतिक परिषद भोपाल द्वारा सम्मानपत्र । ऽ भारत भवन, भोपाल में बुन्देली में काव्यपाठ । ऽ देश के स्थापित मंचों पर अखिल भारतीय कवि सम्मेलनों में खड़ी बोली एवं बुन्देली में विभिन्न प्रान्तों में काव्य पाठ । ऽ आकाशवाणी एवं दूरदर्शन पर बुन्देली में समय-समय पर प्रसारण । | लेखापाल, कार्यालय जिला एवं सत्र न्यायाधीश, पन्ना (म0प्र0) निवास धाम मोहल्ला, पन्ना (म0प्र0) मोबाईल नम्बर - 9179257750 |
मड़वा ऊपर बिछे बिछौना, मड़वई भीतर ढ़ला चला । हरिया हरिया कर रओ हरिया, गोरी कर रई गला गला ।। भुनसारे से गुथना घुम रव, हरिया हक रय लोड़न से । मेड़न मेड़न दओ दौदरा, एड़न उठ रई गोढ़न से ।। छेवला तरे बैठ के रे गई, बलम हार गये बुला बुला । हरिया हरिया कर रओ हरिया, गोरी कर रई गला गला ।। भरो पोतला में पानी, उर दरिया धरो तबेला में । बासो मठा बड़ी बखरी को, जगन्नाथ के बेला में ।। कच्चे केंथा कुचर कुचर के, नोन में खा गये मिला मिला । हरिया हरिया कर रओ हरिया, गोरी कर रई गला गला ।।
भरी गुड़ाखू बड़ो चिलम में, फूका पे फूका मसके । घरवाली ने घूंघट घालो, तनक बोल बोले रसके ।। रस गये गस गये हिया हरष गये, और बरष गये झला झला । हरिया हरिया कर रओ हरिया, गोरी कर रई गला गला ।। सन्तोष ‘बिजावरी’ | मकलन में दरार गये फरवा, खूब ततूरी सी दये तरवा ।। काठ कठोता पानी पी के, चिलम चडी चरखारी की । खोसे उलिया टांगे ढुलियां, जा हुलिया घरवारी की ।। खूबई लगै राम रगडा में, बुरय बिदे रय लुखर गढा में । ड्योढो दूनो काढो कडुवा, बरयाई बरके सूरझो अडुवा ।। दतो रओ दसरय के दिन से, आ गयी रात दिवारी की । खोसे उलिया टांगे ढुलियां, जा हुलिया घरवारी की ।।
चार वेद सी चारउ मेढे, रिचाये पुन्न बीज की छेडे । फसल पकी फिर कृपा राम की, अर्थ धर्म और मोक्ष काम की ।। सबरी साल तपस्या भोगी सुद छोडे संसारी की । खोसे उलिया टांगे ढुलियां, जा हुलिया घरवारी की ।। |